राजिम जयंती पर देमार बना सामाजिक एकता का केंद्र, साहू समाज का भव्य आयोजन, सांसद विजय बघेल हुए शामिल

राजिम जयंती पर देमार बना सामाजिक एकता का केंद्र, साहू समाज का भव्य आयोजन, सांसद विजय बघेल हुए शामिल

पाटन, तरुण बन्छोर। पाटन के ग्राम देमार में तेली समाज की कुल गौरव एवं भक्त शिरोमणि माता राजिम की पावन स्मृति में परिक्षेत्रीय स्तरीय विशाल राजिम जयंती महोत्सव एवं सामाजिक सम्मान समारोह का भव्य और ऐतिहासिक आयोजन किया गया। यह आयोजन परिक्षेत्रीय साहू संघ अरसनारा के तत्वावधान में श्रद्धा, उत्साह और सामाजिक एकता के वातावरण में संपन्न हुआ।

कार्यक्रम का शुभारंभ भव्य कलश यात्रा से हुआ, जिसमें समाज की महिलाओं और युवाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में भाग लेकर पूरे क्षेत्र को भक्तिमय बना दिया। इसके पश्चात विधिवत पूजा-अर्चना, माता राजिम के तेल चित्र पर माल्यार्पण, अतिथियों का स्वागत-सम्मान तथा श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद वितरण किया गया।

राजिम जयंती महोत्सव के प्रथम सत्र में दुर्ग लोकसभा सांसद विजय बघेल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम के प्रमुख अतिथि जितेंद्र साहू, अध्यक्ष तेलघानी बोर्ड छत्तीसगढ़ तथा अतिविशिष्ट अतिथि चुन्नीलाल साहू, पूर्व सांसद महासमुंद रहे। समारोह की अध्यक्षता दिनेश साहू, पूर्व अध्यक्ष तहसील संघ पाटन ने की।

विशिष्ट अतिथियों में लालेश्वर साहू, दिव्या कालिहारी (पूर्व उपाध्यक्ष जिला साहू संघ दुर्ग), किशन हिरवानी (अध्यक्ष परिक्षेत्रीय साहू संघ अरसनारा), हरिराम साहू (स्थानीय साहू समाज देमार), लोकमनी चंद्राकर सहित समाज के अनेक वरिष्ठ पदाधिकारी एवं गणमान्यजन मंचासीन रहे।

इस अवसर पर समाज के सक्रिय कार्यकर्ताओं एवं प्रबुद्धजनों में खेमलाल साहू, चैन सिंह साहू, पूजा राम साहू, नंदकुमार साहू, कमलेश्वरी साहू, अश्विनी साहू, संतोष साहू, ललिता साहू, अर्जुन साहू, मधु साहू, सरिता साहू, विनोद साहू, ओमप्रकाश साहू, शशिभूषण साहू, रवि साहू, बालाराम साहू, रेखराम साहू, सुरेन्द्र साहू सहित बड़ी संख्या में समाज के लोग उपस्थित रहे।

मुख्य अतिथि एवं वक्ताओं ने माता राजिम के त्याग, भक्ति और सामाजिक मूल्यों पर प्रकाश डालते हुए समाज को संगठित रहकर शिक्षा, संस्कार और सामाजिक उत्थान के मार्ग पर आगे बढ़ने का संदेश दिया। वक्ताओं ने सामाजिक एकता, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और नई पीढ़ी को प्रेरित करने पर विशेष जोर दिया।

कार्यक्रम का समापन श्रद्धा, भक्ति और सामाजिक समरसता के वातावरण में हुआ। ग्राम देमार सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं समाजबंधुओं ने आयोजन में सहभागिता कर इसे ऐतिहासिक बनाया।

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