Ladli Behna Yojana Update: भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार की ‘मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना’ महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण योजना है। वर्तमान में 1 करोड़ 26 लाख पात्र महिलाओं को 1,500 रुपए प्रति माह (18000 रु सालाना) दिए जा रहे हैं। आमतौर पर किस्त हर महीने की 10 से 15 तारीख के आसपास राज्य सरकार द्वारा जारी की जाती है। दिसंबर 2025 तक योजना की 31 किस्तें जारी की जा चुकी हैं। संभावना है कि 15 जनवरी 2026 से पहले 32वीं किस्त भी जारी हो सकती है। हालांकि अब तक महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आधिकारिक तारीख का ऐलान नहीं किया है और न ही मोहन सरकार द्वारा इस संबंध में कोई बयान सामने आया है।
2023 में शुरू की गई थी योजना
- मध्य प्रदेश सरकार द्वारा मई 2023 में लाड़ली बहना योजना शुरू की गई थी।योजना के उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना, परिवार में उनके निर्णय अधिकार को मजबूत करना तथा स्वास्थ्य और पोषण स्तर में सतत सुधार सुनिश्चित करना है।
- 10 जून 2023 को योजना की पहली किस्त जारी की गई थी। योजना की शुरुआत में 1000 रुपये प्रतिमाह की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती थी, जिसे अक्टूबर 2023 में बढ़ाकर 1,250 रुपये किया गया।
- इसके बाद नवंबर 2025 से राशि में पुनः 250 रुपये की वृद्धि की गई। इसके अतिरिक्त अगस्त 2023, 2024 व 2025 में रक्षाबंधन के मौके पर 250 रुपये की विशेष सहायता राशि भी बहनों को प्रदान की गई।
- वर्तमान में सामान्य हितग्राही महिलाओं को 1500 रुपए प्रतिमाह दिए जाते हैं। सामाजिक सुरक्षा पेंशन प्राप्त कर रही महिलाओं को 900 रुपये प्रतिमाह मिलते हैं।
- योजना की शुरुआत (जून 2023) से लेकर दिसंबर 2025 तक लगभग 48,632 करोड़ रुपये से अधिक की राशि महिलाओं के खातों में भेजी जा चुकी है।
योजना में किसे मिलता है लाभ
पात्रता:
- मध्य प्रदेश की स्थानीय निवासी हो।
- विवाहित महिला के साथ निर्धन, विधवा, तलाकशुदा एवं परित्यक्ता महिलाएं भी शामिल हैं।
- 21 से 60 वर्ष तक की आयु की महिलाएं पात्रता के दायरे में आती हैं।
अपात्र:
- स्वयं/ परिवार की सम्मिलित रूप से स्वघोषित वार्षिक आय 2.5 लाख से अधिक हो या आयकरदाता हो।
- जिनके पास संयुक्त रूप से 5 एकड़ से अधिक कृषि भूमि हो। जिनके परिवार के पास चार पहिया वाहन (ट्रैक्टर को छोड़कर) हो।
- स्वयं / परिवार का कोई भी सदस्य भारत सरकार अथवा राज्य सरकार के शासकीय विभाग/ उपक्रम/ मण्डल/ स्थानीय निकाय में नियमित/स्थाईकर्मी/संविदाकर्मी के रूप में नियोजित हो अथवा सेवानिवृत्ति उपरांत पेंशन प्राप्त कर रहा हो।

